भारत में लड़कियों की सुरक्षा क्यों आज भी एक बड़ा सवाल हैं।
आज भी हमारे समाज में एक ऐसी समस्या को नॉर्मल बना दिया गया हैं, जिस पर खुलकर बात करना बहुत जरुरी है। वो है लड़कियों की सुरक्षा।
सदियों से समस्या चली आ रही है, लेकिन आज भी जब कोई घटना होती है तो लोग, समाज और परिवार चुप होकर बैठ जाते हैं। सोच .ह बन गई हैं की बोलने से समाज में इज्जत चली जाएगी। यह खासकर गॉव में जयादा देखने को मिल रहा है।
हमें अपनी सोच बदलनी होगी। हर घर में बेटिया है, इसलिए यह सोचना की दुसरों की बेटी के साथ केया हो रहा है, हमें फर्क नही पड़ता , गलत है। चाहे वो घरेलु हिंसा हो , बलतकार हो या छेड़कानी हो जहॉ गलत है वहॉ सबको बोलना चाहिए।
दिल्ली युनिवर्सिटी जैसी जगह पर भी जब लड़कीयों ने अपनी सुरक्षी के लिए आवाज उठाई ,तो उनका मजाक बनाया गया,कभी सोशल मिडिया के द्वारा , उनको गंभिरता से नही लिया गया।
सवाल ये है की क्या ये मुदा ऐसेहो चलता रहेगा , रोज ऐसी खबरे आती है, दो मिनट चर्चा होती हैऔर फिर सब भुल जाते है। लेकिन अगली पिढ़ी हमसे ही सीख हरी है। आज दुनिया कितनी आगे निकल गई है लेकिन ये समस्या कई पिढ़ीयों से देखी जा रही है।

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